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    Tea In Plastic Cups: ऑफिस के बाहर प्लास्टिक के कप में पीते हैं चाय, हो सकती है यह जानलेवा बीमारी

    19 hours ago

    Is Drinking Tea In Plastic Cups Safe: ऑफिस के बाहर ठेले से आई गरमा-गरम चाय, जो पॉलिथीन की थैली या पतले प्लास्टिक कप में सीधे आपकी टेबल तक पहुंचती है, यह रोज की आदत भले सुकून देती हो, लेकिन सेहत के लिहाज से खतरे की घंटी भी हो सकती है. एक्सपर्ट का कहना है कि गरम चाय जब कम क्वालिटी वाले प्लास्टिक या पॉलिथीन में डाली जाती है, तो उसमें मौजूद रसायन पेय में घुल सकते हैं.

    अमृता अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन और एंडोक्रिनोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. मोहित शर्मा के मुताबिक, 60 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पर फ्थैलेट्स, बिस्फेनॉल ए और स्टाइरीन जैसे हानिकारक तत्व चाय में मिल सकते हैं. ये पदार्थ शरीर के हार्मोन तंत्र को प्रभावित करते हैं और लंबे समय में गंभीर बीमारियों की आशंका बढ़ा सकते हैं.

    डॉक्टर बताते हैं कि ये केमिकल एंडोक्राइन डिसरप्टर्स की तरह काम करते हैं, यानी एस्ट्रोजन, टेस्टोस्टेरोन, इंसुलिन और थायरॉइड जैसे हार्मोन के संतुलन को बिगाड़ सकते हैं. अगर कोई व्यक्ति दिन में दो से चार बार ऐसी चाय पीता है, तो कम मात्रा में भी लगातार संपर्क शरीर पर जमा असर डाल सकता है. इसके रिजल्ट के तौर पर हार्मोन असंतुलन, बांझपन की समस्या, वजन बढ़ना, थकान, नींद की गड़बड़ी, इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं. कुछ एक्सपर्ट तो ब्रेस्ट, प्रोस्टेट और थायरॉइड कैंसर के जोखिम में भी वृद्धि की आशंका जताते हैं.

    क्या कहते हैं रिसर्च

    एक्सपर्ट का कहना है कि भले ही बड़े स्तर पर मानव अध्ययन सीमित हों, लेकिन लैब और पशु स्टडी में यह संकेत मिले हैं कि ये रसायन ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाकर डीएनए को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जो कैंसर का कारण बन सकता है. हालिया शोध भी चिंता बढ़ाते हैं. कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि डिस्पोजेबल कप में परोसे गए गरम पेय में हजारों माइक्रोप्लास्टिक कण मौजूद हो सकते हैं. आईआईटी खड़गपुर के साइंटिस्ट का अनुमान है कि लंबे समय तक सिंगल-यूज़ कप के इस्तेमाल से व्यक्ति के शरीर में ग्रामों के हिसाब से प्लास्टिक जमा हो सकता है. वहीं, विदेश में हुए रिसर्च में ह्यूमन ब्रेन टिश्यू में भी माइक्रोप्लास्टिक के अंश पाए गए हैं.

    देश में क्या हैं नियम

    Business Standard की एक रिपोर्ट के अनुसार,  भारत में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी  ने फूड-ग्रेड प्लास्टिक के उपयोग की अनुमति दी है, लेकिन जमीनी स्तर पर सस्ता और रिसाइकिल्ड प्लास्टिक अब भी धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है. ऐसे में एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि गरम चाय हमेशा कांच, स्टील या सिरेमिक के बर्तन में ही लें. कुल्हड़ या मिट्टी के कप भी तुलना सुरक्षित विकल्प माने जाते हैं. 

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    Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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