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    Rinku Singh Father Illness: किस बीमारी से जूझ रहे रिंकू सिंह के पिता, जिसके लिए छोड़ा टी-20 वर्ल्ड कप, यह कितनी खतरनाक?

    2 hours ago

    What Illness Is Rinku Singh’s Father Suffering From: भारतीय क्रिकेटर रिंकू सिंह ने पारिवारिक आपात स्थिति के कारण टीम कैंप छोड़ दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके पिता खचंद्र सिंह गंभीर रूप से बीमार हैं और इसी वजह से रिंकू को अचानक घर लौटना पड़ा. हालांकि बीसीसीआई की ओर से आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आया है कि उनके पिता स्टेज-4 लिवर कैंसर से जूझ रहे हैं.

    बताया जा रहा है कि पिछले एक साल से उनका इलाज चल रहा था, लेकिन हाल के दिनों में उनकी तबीयत काफी बिगड़ गई. कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार उनकी हालत बेहद नाजुक है और वे ग्रेटर नोएडा के एक अस्पताल में वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं. इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए रिंकू सिंह ने टीम से अलग होने का फैसला किया.

    कितनी खतरनाक है बीमारी?

    लिवर कैंसर को गंभीर बीमारियों में गिना जाता है, खासकर जब यह चौथे चरण में पहुंच जाता है. स्टेज-4 का मतलब होता है कि कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल चुका है, जिससे इलाज जटिल हो जाता है और स्थिति बेहद संवेदनशील बन जाती है. ऐसे में मरीज को गहन चिकित्सकीय निगरानी की जरूरत पड़ती है. रिंकू हाल ही में टीम के साथ चेन्नई पहुंचे थे, लेकिन पिता की बिगड़ती हालत की खबर मिलते ही अगली सुबह वापस लौट गए. उनकी उपलब्धता अब जिम्बाब्वे के खिलाफ होने वाले अहम टी-20 मुकाबले के लिए संदिग्ध मानी जा रही है. 

    कितना खतरनाक है लिवर कैंसर?

    हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली मायो क्लिनिक के अनुसार, लिवर कैंसर वह बीमारी है जिसकी शुरुआत लिवर की सेल्स से होती है. लिवर पेट के ऊपरी दाएं हिस्से में, डायफ्राम के नीचे और पेट के ऊपर स्थित एक महत्वपूर्ण अंग है. शरीर में यह कई जरूरी काम करता है, जैसे खून को साफ करना, पाचन में मदद करना और पोषक तत्वों को स्टोर करना. लिवर में कई तरह के कैंसर विकसित हो सकते हैं, लेकिन सबसे आम प्रकार हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा है, जो लिवर की मुख्य सेल्स यानी हेपेटोसाइट्स से शुरू होता है. इसके अलावा इंट्राहेपेटिक कोलैंजियोकार्सिनोमा और हेपेटोब्लास्टोमा जैसे अन्य प्रकार भी होते हैं, हालांकि ये अपेक्षाकृत कम देखे जाते हैं. कई मामलों में कैंसर लिवर से शुरू नहीं होता, बल्कि शरीर के किसी दूसरे हिस्से जैसे कोलन, फेफड़े या ब्रेस्ट से फैलकर लिवर तक पहुंचता है. ऐसे मामलों को मेटास्टेटिक कैंसर कहा जाता है और इसका नाम उस अंग के आधार पर रखा जाता है, जहां से इसकी शुरुआत हुई थी.

    क्या होते हैं इसके लक्षण?

    प्राथमिक लिवर कैंसर के शुरुआती चरण में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते. जब बीमारी बढ़ने लगती है, तब कुछ संकेत सामने आ सकते हैं. इनमें बिना कोशिश के वजन कम होना, भूख न लगना, पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, मतली या उल्टी, लगातार कमजोरी और थकान शामिल हैं. कुछ लोगों में पेट में सूजन, त्वचा और आंखों के सफेद हिस्से का पीला पड़ जाना जिसे पीलिया कहा जाता है, और मल का सफेद या फीका दिखना जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं. यदि ऐसे किसी भी लक्षण का अनुभव हो जो चिंता पैदा करे या लंबे समय तक बना रहे, तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है. शुरुआती जांच और सही इलाज से स्थिति को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है.

    इसे भी पढ़ें- Testicle Pain Causes:हल्की-सी चोट लगते ही होता है तेज दर्द, आखिर शरीर के बाहर ही क्यों लटके रहते हैं टेस्टिकल्स?

    Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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