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    Ramadan Fasting with Diabetes: रमजान में रोजा कैसे रखें डायबिटीज के मरीज, डॉक्टर से जानें फास्टिंग विंडो मैनेज करने का तरीका

    3 hours ago

    Can People with Type 2 Diabetes Fast During Ramadan: रमजान का रोजा बेहद अहम होता है, लेकिन डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के लिए इसे सोच-समझकर रखने की जरूरत होती है. सही तैयारी, संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी और डॉक्टर की सलाह के साथ कई लोग सुरक्षित तरीके से रोजा रख सकते हैं. बिना प्लानिंग के लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहने से ब्लड शुगर अचानक गिर या बढ़ सकती है, डिहाइड्रेशन हो सकता है और मुश्किलें पैदा हो सकती हैं.

    एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

    डॉ. अंशुल सिंह ने TOI को बताया कि रोजा शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. ब्लड शुगर की नियमित जांच करना भी उतना ही अहम है और इससे रोजा नहीं टूटता. शुगर लेवल अचानक गिरने या बढ़ने का समय रहते पता चल जाता है. डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. राजीव कोविल के अनुसार सबसे पहले "रिस्क स्ट्रैटिफिकेशन" जरूरी है. जिन लोगों की टाइप 2 डायबिटीज कंट्रोल में है, वे मेडिकल निगरानी में रोजा रख सकते हैं. लेकिन जिन मरीजों को किडनी रोग, हार्ट डिजीज, हार्ट फेल्योर, गर्भावस्था या हालिया इंफेक्शन है, उन्हें रोजा रखने से बचना चाहिए. दवाओं में बदलाव भी जरूरी हो सकता है, खासकर अगर मरीज इंसुलिन या सल्फोनाइलयूरिया ले रहा हो. सुबह की डोज़ कम या शाम में शिफ्ट की जा सकती है ताकि शुगर बहुत नीचे न गिरे.

    आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

    सहरी का खाना संतुलित होना चाहिए, धीरे पचने वाले कार्बोहाइड्रेट, पर्याप्त प्रोटीन और फाइबर शामिल हों. जैसे ओट्स उपमा के साथ उबला अंडा, बेसन चीला के साथ दही, ग्रिल्ड चिकन और मिलेट रोटी, या सब्ज़ी ऑमलेट. नमकीन और ज्यादा मीठे भोजन से बचें क्योंकि ये प्यास बढ़ाते हैं और शुगर तेजी से बढ़ा सकते हैं. इफ्तार में रोजा धीरे-धीरे खोलें. खजूर परंपरा का हिस्सा है, लेकिन उसकी मात्रा कार्बोहाइड्रेट गिनती में शामिल करें. एक खजूर और पानी से शुरुआत करें, फिर कुछ देर बाद हल्का सूप लें. प्लेट में आधी मात्रा बिना स्टार्च वाली सब्जियों की, चौथाई भाग प्रोटीन जैसे कि चिकन, मछली, दाल और चौथाई भाग साबुत अनाज रखें. तले हुए पकवान और अत्यधिक मिठाई से बचें, क्योंकि रात में शुगर तेजी से बढ़ सकती है.

    ब्लड ग्लूकोज चेक कराना जरूरी

    डॉ. डेविड चैंडी बताते हैं कि दिन में कई बार ब्लड ग्लूकोज चेक करना जरूरी है, जिसमें सहरी से पहले, दोपहर में, शाम को और इफ्तार के दो घंटे बाद. यदि शुगर 70 mg/dL से कम या 300 mg/dL से ज्यादा हो जाए या चक्कर, पसीना, कमजोरी या डिहाइड्रेशन के लक्षण हों, तो तुरंत रोजा तोड़ देना चाहिए. हाइड्रेशन भी बेहद जरूरी है. इफ्तार और सहरी के बीच 8 से 10 गिलास तरल लें, जिसमें नींबू पानी, इन्फ्यूज़्ड वाटर, छाछ, सूप या हर्बल चाय बेहतर विकल्प हैं. कैफीन सीमित रखें. एक्सपर्ट का कहना है कि रमजान और डायबिटीज साथ-साथ चल सकते हैं, लेकिन शर्त है कि तैयारी, संतुलन और मेडिकल निगरानी सही से होना चाहिए. 

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