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    Melanoma Cases In UK: शरीर के तिलों को कतई न करें इग्नोर, बढ़ रहा है स्किन कैंसर का खतरनाक रूप

    17 hours ago

    Melanoma Cases Increasing In UK: ब्रिटेन में स्किन कैंसर के सबसे खतरनाक रूप मेलानोमा के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. हाल ही में जारी कैंसर रिसर्च यूके की नई रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2022 में यूके में 20 हजार से ज्यादा लोगों में मेलानोमा की पुष्टि हुई, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है. रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर यही रफ्तार जारी रही तो 2040 तक हर साल करीब 26,500 लोग इस बीमारी का शिकार हो सकते हैं.

    पुरुष या महिला- कौन हो रहा सबसे ज्यादा शिकार?

    रिसर्च के अनुसार पुरुषों में मेलानोमा के मामलों में 23 प्रतिशत और महिलाओं में 26 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होने का अनुमान है. सबसे ज्यादा चिंता बुजुर्गों को लेकर जताई गई है. 80 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में पिछले दस साल के दौरान मेलानोमा के मामलों में 57 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. एक्सपर्ट का कहना है कि बढ़ती आबादी और उम्रदराज लोगों की संख्या इसकी एक वजह जरूर है, लेकिन असली कारण जरूरत से ज्यादा यूवी यानी अल्ट्रावॉयलेट किरणों के संपर्क में आना है. रिपोर्ट के मुताबिक यूके में लगभग 90 प्रतिशत मेलानोमा के मामले सूरज की तेज किरणों और सनबेड के इस्तेमाल से जुड़े हैं. यानी करीब 17 हजार मामले ऐसे हैं जिन्हें सही सावधानी बरतकर रोका जा सकता था.

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    अल्ट्रावॉयलेट किरणों का कितना बड़ा रोल?

    इसी बीच इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर की एक नई स्टडी में भी चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. रिसर्च के मुताबिक 2022 में दुनियाभर में सामने आए मेलानोमा के 80 प्रतिशत से ज्यादा मामले UV रेडिएशन के कारण हुए. दुनियाभर में दर्ज 3.32 लाख मामलों में से करीब 2.67 लाख सीधे तौर पर यूवी किरणों से जुड़े पाए गए. डॉक्टरों के अनुसार मेलानोमा त्वचा की उन सेल्स में विकसित होता है जो मेलेनिन बनाती हैं. यही मेलेनिन हमारी त्वचा को रंग देता है. यह कैंसर इसलिए ज्यादा खतरनाक माना जाता है क्योंकि यह तेजी से शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल सकता है.

    महिलाओं में ज्यादा मेलानोमा 

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 55 साल से कम उम्र की महिलाओं में मेलानोमा के मामले पुरुषों की तुलना में ज्यादा मिल रहे हैं. इसकी एक वजह धूप में ज्यादा समय बिताना और टैनिंग की आदत मानी जा रही है. वहीं उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों में लंबे समय तक धूप के संपर्क के कारण खतरा बढ़ जाता है. एक्सपर्ट ने लोगों को एसआरएफ 30 या उससे ज्यादा वाले ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन इस्तेमाल करने की सलाह दी है. हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि सिर्फ सनस्क्रीन पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है. पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना, तेज धूप के समय छांव में रहना और सनबेड से दूरी बनाना ज्यादा प्रभावी तरीका है.

    कब होना चाहिए सावधान?

    एक्सपर्ट का अनुसार, अगर त्वचा पर नया तिल दिखाई दे, पुराना तिल बदलने लगे या कोई घाव लंबे समय तक ठीक न हो तो तुरंत जीपी से संपर्क करना चाहिए. उन्होंने कहा कि शुरुआती चरण में बीमारी पकड़ में आने पर इलाज की सफलता की संभावना करीब 95 प्रतिशत तक रहती है.

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    Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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